Dissent Congress Lawmaker Want Change In Leadership And Removal Of Ashok Gehlot As Chief Minister – राजस्थान में हार के बाद जारी है रार, कांग्रेस विधायक ने की अशोक गहलोत को हटाने की मांग

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Dissent Congress Lawmaker Want Change In Leadership And Removal Of Ashok Gehlot As Chief Minister - राजस्थान में हार के बाद जारी है रार, कांग्रेस विधायक ने की अशोक गहलोत को हटाने की मांग


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Updated Thu, 06 Jun 2019 09:29 AM IST

अशोक गहलोत-सचिन पायलट (फाइल फोटो)
– फोटो : PTI

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लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से राजस्थान के राजनीतिक हालात सामान्य नहीं है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ नेता पहले दबी आवाज में बोल रहे थे अब यह मांग सार्वजनिक रूप से खुलकर सामने आ गई है। नेता नेतृत्व में बदलाव चाहते हैं। पार्टी का एक हिस्सा हार के लिए गहलोत को जिम्मेदार मानता है। कांग्रेस विधायक पृथ्वीराज मीणा ने बुधवार को कहा, ‘सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। अशोक गहलोत अपना प्रभाव खो चुके हैं।’

मीणा टोडा भीम से कांग्रेस विधायक हैं। उनका सुझाव है कि एक युवा मुख्यमंत्री अच्छा काम कर सकता है। मीणा ने कहा कि चुनाव के दौरान पायलट कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष थे। मीणा पूर्वी राजस्थान के जनजातीय समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कहा कि गहलोत जाट और गुर्जरों को एक साथ रखने में नाकामयाब रहे हैं। राजस्थान के दो मंत्रियों रमेश मीणा और उदय लाल अंजना ने हाल ही में कहा था कि राजस्थान में हार की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। 

असंतोष और गुटबाजी का सामना करने वाले अशोक गहलोत ने एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि उनके बेटे वैभव गहलोत की जोधपुर लोकसभा सीट से हार की जिम्मेदारी सचिन पायलट को लेनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा था, ‘पायलट साहब ने कहा था कि वह जोधपुर से बहुत बड़े अंतर से जीतेगा क्योंकि हमारे छह विधायकों को इस लोकसभा सीट से जीत हासिल हुई थी। हमारा चुनाव प्रचार भी बढ़िया था। इसलिए मुझे लगता है कि उन्हें इस सीट की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।’

गहलोत पर उनकी पार्टी के लोग ही आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने अपने बेटे के चुनाव प्रचार के लिए बाकी की सीटों पर ध्यान नहीं दिया। दिसंबर में सत्ता में आने के बाद से ही गहलोत और पायलट के रिश्ते ठीक नहीं चल रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के कहने पर पायलट ने मुख्यमंत्री पद से अपना दावा छोड़ दिया था। इसके बाद गहलोत ने उच्च नेतृत्व से कहा था कि वह लोकसभा चुनाव में पार्टी को बेहतर नतीजे देंगे। मगर पार्टी यहां खाता तक नहीं खोल पाई।

लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से राजस्थान के राजनीतिक हालात सामान्य नहीं है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ नेता पहले दबी आवाज में बोल रहे थे अब यह मांग सार्वजनिक रूप से खुलकर सामने आ गई है। नेता नेतृत्व में बदलाव चाहते हैं। पार्टी का एक हिस्सा हार के लिए गहलोत को जिम्मेदार मानता है। कांग्रेस विधायक पृथ्वीराज मीणा ने बुधवार को कहा, ‘सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। अशोक गहलोत अपना प्रभाव खो चुके हैं।’

मीणा टोडा भीम से कांग्रेस विधायक हैं। उनका सुझाव है कि एक युवा मुख्यमंत्री अच्छा काम कर सकता है। मीणा ने कहा कि चुनाव के दौरान पायलट कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष थे। मीणा पूर्वी राजस्थान के जनजातीय समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कहा कि गहलोत जाट और गुर्जरों को एक साथ रखने में नाकामयाब रहे हैं। राजस्थान के दो मंत्रियों रमेश मीणा और उदय लाल अंजना ने हाल ही में कहा था कि राजस्थान में हार की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। 

असंतोष और गुटबाजी का सामना करने वाले अशोक गहलोत ने एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि उनके बेटे वैभव गहलोत की जोधपुर लोकसभा सीट से हार की जिम्मेदारी सचिन पायलट को लेनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा था, ‘पायलट साहब ने कहा था कि वह जोधपुर से बहुत बड़े अंतर से जीतेगा क्योंकि हमारे छह विधायकों को इस लोकसभा सीट से जीत हासिल हुई थी। हमारा चुनाव प्रचार भी बढ़िया था। इसलिए मुझे लगता है कि उन्हें इस सीट की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।’

गहलोत पर उनकी पार्टी के लोग ही आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने अपने बेटे के चुनाव प्रचार के लिए बाकी की सीटों पर ध्यान नहीं दिया। दिसंबर में सत्ता में आने के बाद से ही गहलोत और पायलट के रिश्ते ठीक नहीं चल रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के कहने पर पायलट ने मुख्यमंत्री पद से अपना दावा छोड़ दिया था। इसके बाद गहलोत ने उच्च नेतृत्व से कहा था कि वह लोकसभा चुनाव में पार्टी को बेहतर नतीजे देंगे। मगर पार्टी यहां खाता तक नहीं खोल पाई।





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